पाकिस्तान में हुई United States और Iran के बीच अहम वार्ता के असफल रहने के बाद ईरान की ओर से सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि बातचीत पूरी गंभीरता और सकारात्मक सोच के साथ की गई, लेकिन अमेरिका पर भरोसा नहीं बन सका।
गालिबाफ ने कहा कि ईरान ने वार्ता से पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उसके पास समझौते के लिए इच्छाशक्ति है, लेकिन पिछले संघर्षों के अनुभवों के कारण वह अमेरिकी पक्ष पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकता।
ईरान के प्रस्तावों के बावजूद नहीं बनी सहमति
उन्होंने बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई सकारात्मक सुझाव दिए, लेकिन अमेरिकी पक्ष इस दौरान भरोसा कायम करने में सफल नहीं रहा। उनके मुताबिक, ईरान ने आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन विश्वास की कमी सबसे बड़ी बाधा बन गई।
अमेरिका को दिया संदेश
गालिबाफ ने साफ कहा कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह ईरान का भरोसा जीतने के लिए क्या कदम उठाता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान बातचीत को अपनी रणनीति का हिस्सा मानता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
पाकिस्तान की भूमिका की सराहना
इस दौरान उन्होंने Pakistan की मध्यस्थता की सराहना करते हुए उसे “भाई देश” बताया और वार्ता आयोजित कराने के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।
टीम और जनता को दिया श्रेय
गालिबाफ ने 21 घंटे तक चली इस लंबी बातचीत में शामिल अपने प्रतिनिधिमंडल की सराहना की और देश की जनता का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि ईरान की जनता के समर्थन और एकजुटता ने उन्हें इस वार्ता में मजबूती दी।
निष्कर्ष:
बातचीत के विफल रहने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है। फिलहाल स्थिति यह दिखाती है कि भविष्य में किसी समझौते के लिए सबसे बड़ी चुनौती आपसी भरोसे की कमी बनी रहेगी।
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