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UNGA में ट्रंप का संबोधन, ईरान की चेतावनी से ‘सुपर इंटेलिजेंस’ तक भाषण की 10 प्रमुख बातें

Trump UN Speech: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। करीब 37 मिनट के भाषण में उन्होंने ईरान, गाजा, यूक्रेन, भारत-पाकिस्तान संघर्ष, ग्रीनलैंड, वेनेजुएला, क्यूबा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट समेत कई मुद्दों पर अपनी सरकार की नीतियों और दावों को सामने रखा। ट्रंप ने कई संघर्षों को रोकने में अमेरिकी भूमिका का भी दावा किया।

1. कई संघर्षों को रोकने का दावा

ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि उनके प्रशासन ने दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे संघर्षों को रोकने में भूमिका निभाई है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष, गाजा और आर्मेनिया-अजरबैजान समेत कई विवादों का उल्लेख करते हुए अपने प्रयासों को इसका हिस्सा बताया। भारत लंबे समय से पाकिस्तान के साथ किसी भी विवाद में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की भूमिका को स्वीकार नहीं करने की अपनी नीति स्पष्ट करता रहा है।

2. ईरान को लेकर बेहद कड़ा संदेश

भाषण में ईरान प्रमुख मुद्दों में रहा। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं होता तो अमेरिका उसके खिलाफ बेहद कठोर कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपना रुख दोहराया और कहा कि आगे का रास्ता बातचीत या बेहद गंभीर परिणामों में से एक हो सकता है।

3. ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अपील

ट्रंप ने दूसरे देशों से भी ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की अपील की। उनके मुताबिक ईरान को वैश्विक स्तर पर आर्थिक रूप से अलग-थलग करने से तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने विभिन्न देशों से ईरान के खिलाफ अपने आर्थिक कदमों को मजबूत करने की बात कही।

4. वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई का बचाव

ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई का भी बचाव किया और इसे अमेरिकी हितों से जोड़कर पेश किया। उन्होंने अपने प्रशासन की वेनेजुएला नीति को उपलब्धि के तौर पर बताया। अमेरिकी सरकार ने इससे पहले वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र को लेकर बड़े बदलावों और वहां अमेरिकी भागीदारी से जुड़े समझौते की घोषणा की थी।

5. क्यूबा और कम्युनिज्म पर ट्रंप का रुख

ट्रंप ने क्यूबा का जिक्र करते हुए अमेरिका और उसके आसपास के क्षेत्र में कम्युनिस्ट शासन के विस्तार का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने क्षेत्र में ऐसी विचारधारा को बढ़ावा नहीं देगा। भाषण के दौरान क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल के बाहर जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।

6. ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा सुरक्षा समझौता

ग्रीनलैंड भी ट्रंप के भाषण का अहम हिस्सा रहा। उन्होंने अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए सुरक्षा समझौते का उल्लेख किया। ट्रंप के अनुसार इस समझौते के तहत अमेरिका ग्रीनलैंड की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा और वहां अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाएगा।

उन्होंने दो बड़े सैन्य ठिकाने विकसित करने की बात भी कही। समझौते का उद्देश्य आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में सुरक्षा को मजबूत करना बताया गया है। हालांकि, ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र बना हुआ है और समझौते को वास्तविक अमेरिकी कब्जे के रूप में नहीं बताया गया है।

7. AI का नाम बदलकर ‘Super Intelligence’ करने की बात

ट्रंप के भाषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मुद्दा भी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में AI को आगे “Super Intelligence” के नाम से संदर्भित किया जाएगा। उन्होंने AI पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक नियंत्रण की कोशिशों का विरोध किया और तकनीकी क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व पर जोर दिया।

8. ICC पर ट्रंप का हमला

ट्रंप ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC की भी आलोचना की। उन्होंने अदालत की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सदस्य देशों से संस्था के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने की अपील की। उनके भाषण में ICC को लेकर अमेरिकी प्रशासन की आपत्ति स्पष्ट रूप से सामने आई।

9. हॉर्मुज और ईरान पर दबाव

ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का भी जिक्र किया और ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए रखने की बात कही। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी अपने संबोधन में उठाया और ईरान के खिलाफ दबाव बढ़ाने की अपील की।

10. अमेरिका की सैन्य और आर्थिक ताकत पर जोर

भाषण के अंतिम हिस्से में ट्रंप ने अमेरिका की आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत और तकनीकी बढ़त का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका देश मौजूदा दौर में पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। ट्रंप ने अपने प्रशासन की नीतियों को अमेरिका की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति मजबूत कर

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