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अमेरिका का टैरिफ बम, 17 देशों पर अतिरिक्त शुल्क; भारत और पाकिस्तान पर क्या होगा प्रभाव?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने व्यापार और श्रम मानकों को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए 17 देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है, जहां जबरन मजदूरी (Forced Labour) से जुड़े उत्पादों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं किए जाने की बात कही गई है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत यह निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के अनुसार अतिरिक्त टैरिफ 24 जुलाई से लागू किया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में श्रम मानकों को मजबूत करना और अनुचित व्यापार प्रथाओं को हतोत्साहित करना है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले से पहले कई व्यापारिक साझेदार देशों की समीक्षा की गई थी। समीक्षा के आधार पर अलग-अलग देशों को विभिन्न टैरिफ श्रेणियों में रखा गया है।

इन देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ

10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ जिन देशों पर लागू किया गया है, उनमें शामिल हैं:

  • भारत
  • पाकिस्तान
  • बांग्लादेश
  • श्रीलंका
  • अर्जेंटीना
  • कंबोडिया
  • कनाडा
  • इक्वाडोर
  • अल सल्वाडोर
  • ग्वाटेमाला
  • होंडुरास
  • इंडोनेशिया
  • जॉर्डन
  • मलेशिया
  • मेक्सिको
  • त्रिनिदाद एंड टोबैगो
  • यूनाइटेड किंगडम

इसके अलावा कुछ अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का भी फैसला किया गया है।

भारत पर 10% ही क्यों लगा?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती समीक्षा में भारत पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर विचार किया गया था। हालांकि श्रम मानकों और लेबर प्रैक्टिस से जुड़े मुद्दों पर हुई बातचीत के बाद भारत को 10 प्रतिशत वाले स्लैब में रखा गया।

अमेरिका का क्या कहना है?

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम वैश्विक स्तर पर श्रमिक अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त टैरिफ से संबंधित देशों को अपने श्रम कानूनों और आयात नियंत्रण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

आने वाले समय में इस फैसले का असर संबंधित देशों के निर्यात, व्यापारिक संबंधों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। वहीं प्रभावित देश इस निर्णय पर अपनी व्यापारिक और कूटनीतिक रणनीति तय कर सकते हैं।

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