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दंपतियों के लिए बड़ी सुविधा, तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में शुरू होगा इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट

तमिलनाडु में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के तहत परिवार कल्याण कार्यक्रम का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। अब तक जहां इन सेवाओं का मुख्य फोकस परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक उपायों पर रहा है, वहीं अब बच्चा चाहने के बावजूद गर्भधारण में परेशानी का सामना कर रहे दंपतियों को भी सरकारी स्तर पर सहायता देने की योजना बनाई जा रही है।

इसके तहत जिला स्तर के सरकारी अस्पतालों में गर्भधारण से पहले परामर्श और इनफर्टिलिटी से जुड़ा इलाज उपलब्ध कराने की तैयारी है। राज्य सरकार का यह कदम घटती जन्म दर और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच उठाया जा रहा है।

जिला अस्पतालों में उपलब्ध होगी इनफर्टिलिटी से जुड़ी सुविधा

योजना के तहत जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पतालों में ऐसे दंपतियों को इलाज उपलब्ध कराया जाएगा, जिन्हें संतान प्राप्ति में परेशानी हो रही है। इसके साथ ही गर्भधारण से पहले जरूरी चिकित्सकीय सलाह भी दी जाएगी।

जिन क्षेत्रों में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल मौजूद नहीं हैं, वहां भी इस तरह की सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। कुछ चुनिंदा केंद्रों पर गर्भधारण में सहायता करने वाली विशेष प्रक्रियाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए लोगों को इन सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली स्वास्थ्यकर्मी जरूरतमंद दंपतियों को उपयुक्त सरकारी अस्पताल तक पहुंचने में सहायता करेंगी। इससे मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही सही सलाह और उपचार मिल सकेगा।

तमिलनाडु में लगातार कम हो रही जन्म दर

तमिलनाडु में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जन्म की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में राज्य में करीब 9.39 लाख बच्चों का जन्म हुआ था। 2025 में यह संख्या घटकर लगभग 8.02 लाख रह गई।

राज्य में कुल प्रजनन दर यानी एक महिला के जीवनकाल में औसतन बच्चों की संख्या भी करीब 1.3 तक पहुंच गई है। जनसंख्या को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए सामान्य तौर पर करीब 2.1 की प्रजनन दर को प्रतिस्थापन स्तर माना जाता है।

वहीं, राज्य की आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। वर्तमान में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की आबादी करीब 16 प्रतिशत बताई जा रही है। अनुमान है कि 2036 तक यह हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

इन्हीं जनसांख्यिकीय बदलावों को देखते हुए तमिलनाडु सरकार परिवार कल्याण सेवाओं में बदलाव पर जोर दे रही है।

बच्चा पैदा करने के लिए किसी पर नहीं होगा दबाव

सरकार की इस पहल का उद्देश्य लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना नहीं है। परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक से जुड़ी मौजूदा सेवाएं जारी रहेंगी। सुरक्षित गर्भपात से संबंधित स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य उन दंपतियों को चिकित्सा सहायता देना है जो संतान चाहते हैं, लेकिन किसी कारण से गर्भधारण नहीं कर पा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि बार-बार गर्भधारण करने वाली महिलाओं में मातृ स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। ऐसे में सरकार का फोकस ज्यादा बच्चों के जन्म को बढ़ावा देने के बजाय चाहने वाले दंपतियों को उचित चिकित्सा सहायता, परामर्श और उपचार उपलब्ध कराने पर है।

गांवों तक पहुंचेगी जानकारी

इस पहल में केवल जिला अस्पतालों को ही नहीं, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को भी जोड़ा जाएगा। स्वास्थ्यकर्मी लोगों को उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देंगे और जरूरत पड़ने पर दंपतियों को विशेषज्ञ सेवाओं वाले अस्पतालों तक रेफर किया जाएगा।

इससे इनफर्टिलिटी से जुड़ी समस्या के इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम करने और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के जरिए शुरुआती स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।

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